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हाइपरथर्मिया एक प्रकार का चिकित्सकीय उपचार है जिसमें शरीर के ऊतक अपेक्षाकृत अधिक तापमान (113°F तक) के संपर्क में आते हैं जो कैंसर कोशिकाओं को मार या क्षतिग्रस्त कर सकता है जबकि सामान्य, स्वस्थ ऊतकों को सुरक्षित रखता है। इसे थर्मोथेरेपी, थर्मल थेरेपी या थर्मल एब्लेशन भी कहा जाता है।
हाइपरथर्मिया का उपयोग कैंसर कोशिकाओं को अन्य उपचारों जैसे कि रेडिएशन थेरेपी और कीमोथेरेपी के प्रति अधिक संवेदनशील बनाने के लिए किया जाता है।
हाइपरथर्मिया, कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी के संयोजन में सिर और गर्दन के भाग, प्रोस्टेट, स्तन,सर्विक्स और मलाशय के कैंसरों और मेलानोमा और सॉफ्ट टिश्यू सरकोमा के लिए प्रभावी पाया गया है।
हाइपरथर्मिया विभिन्न प्रकार के होते हैं, जिनमें स्थानीय हाइपरथर्मिया, क्षेत्रीय हाइपरथर्मिया और पूरे शरीर का हाइपरथर्मिया शामिल हैं। स्थानीय हाइपरथर्मिया और क्षेत्रीय हाइपरथर्मिया विशेष अंग में कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने में मदद करते है जबकि पूरे शरीर के हाइपरथर्मिया की कैंसर के विरूद्ध प्रभावशीलता और सुरक्षा का अभी अध्ययन किया जा रहा है।
हाइपरथर्मिया प्रमुख रूप से कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट करके और उनको अन्य कैंसर उपचारों के बारे में संवेदनशील बनाकर कार्य करता है। हाइपरथर्मिया कैंसर कोशिकाओं पर किस प्रकार कार्य करता है, इसकी प्रमुख प्रणालियां निम्न हैं:
हाइपरथर्मिया विविध माध्यमों से किया जाता है, जैसे कि रेडियो तरंगें, लेज़र, अल्ट्रासाउंड, हीटिंग फ्ल्युइड्स जैसे कि रूधिर और कीमोथेरेपी दवाएं, और अंत में, पूरे शरीर को हीटेड चैम्बर्स, हॉट वाटर बॉथ और हीटेड ब्लैंकेट से गर्म किया जाता है।
यह न्यूनतम इन्वेसिव प्रक्रिया है और इसके लिए सामान्य निश्चेतक (एनस्थेसिया) की ज़रूरत नहीं होती।
प्रक्रिया के दौरान, डॉक्टर, ट्यूमर में छोटे थर्मामीटरों वाले छोटे प्रोब डालने के लिए लक्ष्य भाग को सुन्न कर सकते हैं। ये थर्मामीटर, पूरे सत्र के दौरान ट्यूमर और आसपास के ऊतकों के तापमान की बारीक निगरानी के लिए अनिवार्य हैं। इमेजिंग विधियां जैसे कि CT स्कैन, का उपयोग यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है कि प्रोब सही स्थान पर लगे हैं।
उपचार अवधि 30 मिनट से 60 मिनट के बीच हो सकती है।
रेडिएशन थेरेपी के साथ हाइपरथर्मिया, ट्यूमर के एसिडिक, कम ऑक्सीजनेटेड भागों को क्षतिग्रस्त कर सकता है और वृद्धि रोक सकता है।
यह समग्र उपचार को अधिक प्रभावी बनाता है और सकारात्मक परिणामों की संभावनाएं बढ़ा देता है।
हाइपरथर्मिया कुछ विशेष एंटी-कैंसर दवाओं का प्रभाव बढ़ा देता है।
रेडिएशन और कीमोथेरेपी के साथ हाइपरथर्मिया, ट्यूमर्स को सिकोड़ सकता है।
हाइपरथर्मिया आसपास के स्वस्थ ऊतकों को पहुंचने वाले नुकसान को कम करने में मदद करता है।
हाइपरथर्मिया से जुड़े सामान्य दुष्प्रभावों में (स्थानीय और क्षेत्रीय) साइट पर दर्द, रूधिर के थक्के, रक्तस्राव, सूजन, छाले, उपचारित भाग की त्वचा, तंत्रिकाओं और पेशियों का जलना और क्षतिग्रस्त होना और संक्रमण शामिल हैं।
नहीं, हाइपरथर्मिया कैंसर का इलाज नहीं है। हालांकि रेडिएशन थेरेपी या कीमोथेरेपी के साथ उपयोग किए जाने पर हाइपरथर्मिया कुल उपचार की प्रभावशीलता में सुधार कर सकता है।
आपके उपचारकर्ता डॉक्टर आपकी रिपोर्टों को सावधानी से देखेंगे और आपकी दशा का पूरी तरह से अध्ययन करेंगे और हाइपरथर्मिया की केवल तभी सिफारिश करेंगे यदि यह आपके लिए सही उपचार हो।
नहीं, हीट से कैंसर के वृद्धि करने या फैलने का कोई प्रमाण नहीं है। दूसरी ओर, अनेक अध्ययनों में यह पता चला है कि हीट से उपचार या थर्मल उपचार कैंसर कोशिकाओं को रेडिएशन और एंटी-कैंसर दवाओं के प्रति अधिक संवेदनशील बनाकर कैंसर उपचारों की प्रभावशीलता बढ़ा सकता है।
अनेक अध्ययनों में सूचित किया गया है कि स्थानीय और क्षेत्रीय हाइपरथर्मिया, कैंसर कोशिकाओं’ की विभाजित होने की क्षमता को प्रभावित करके और उनको रेडिएशन थेरेपी और कीमोथेरेपी के प्रति अधिक संवेदनशील बनाकर इन उपचारों को बेहतर कार्य करने में मदद करता है। यह भी पाया गया है कि हाइपरथर्मिया ट्यूमर्स को सिकोड़ सकता है और अंततः सफल कैंसर उपचार की संभावनाएं बढ़ा सकता है।